क्यों है रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना खास

क्यों है रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना खास क्यों है रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना खास

by Preeti Chaudhary

रामनाथ कोविंद देश के 14 राष्ट्रपति के रूप में पदासीन हो गए हैं, और राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने प्रथम भाषण में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों एवं उनके नेताओं, सांसद और विधायकों का आभार प्रकट किया, साथ ही विपक्ष की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार को भी धन्यवाद कहा। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कहा कि मैं उन सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करूंगा जो जिंदगी जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मेरी जीत उन लोगों के लिए एक संदेश है जो ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। मैंने कभी राष्ट्रपति बनने की कल्पना नहीं की थी। मेरा राष्ट्रपति पद पर आसीन होना राष्ट्रीय लोकतंत्र की महानता का प्रमाण है।

वायसराय हाउस से राष्ट्रपति भवन तक का सफर

राष्ट्रपति भवन की स्थापना अंग्रेजों द्वारा की गई थी, तथा अंग्रेजों ने इस भवन का नाम वायसराय हाउस रखा था। 26 जनवरी 1950 को इस भवन का नाम वायसराय हाउस से राष्ट्रपति भवन कर दिया गया। उसी राष्ट्रपति भवन में प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने अपने पद की शपथ ली थी। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन के कमरों को भारतीय बनाने के लिए देश में बने हैंडीक्राफ्ट से सजाने की विनती आधिकारिक पत्राचार के माध्यम से की थी। इस मुहिम में कई राज्यों ने उनका साथ दिया था, तब जाकर ब्रिटिश साम्राज्य की देन यह भवन भारतीय गणतंत्र का प्रतीक बना।

रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति चुना जाना बदलाव की नई शुरुआत

संसद में राम नाथ कोविंद का पहला भाषण सारगर्भित तथा सकारात्मक था। उन्होंने यह भाषण किसी पार्टी विशेष के पक्ष में नहीं बल्कि आम जनता के हितैषी के रूप में दिया। उन्होंने देश की 123 करोड़ जनता को नमन किया जिसने उन पर भरोसा जताया और अपने प्रथम भाषण में उन्होंने जिन लोगों के नाम लिए तथा जिन लोगों के नाम छोड़ दिए वह काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का एहसास है कि मैं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जैसी विभूतियों के पदचिन्हों पर चलने जा रहा हूं।

राष्ट्रपति गोविंद ने कहा कि देश का प्रत्येक व्यक्ति भारतीय परंपरा व मूल्यों का संरक्षक है और यही विरासत हम आने वाली पीढ़ियों को देकर जायेंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश की सीमाओं पर देश की रक्षा कर हमें सुरक्षित करने वाले सैनिक राष्ट्र के निर्माता है। जो पुलिस और अर्धसैनिक बल आतंकवाद और नक्सलियों से लड़कर देश की रक्षा कर रहे हैं वह राष्ट्र निर्माता हैं। जो किसान तपती धूप में देश के लोगों के लिए अन्न उगा रहा है वह राष्ट्र निर्माता हैं। देश के वह नौजवान राष्ट्र निर्माता है जो स्टार्ट अप इंडिया के तहत अपना स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। यह स्टार्टअप छोटे से खेत में आम का अचार बनाने के काम से लेकर बड़े उद्योगों के निर्माण तक कुछ भी हो सकता है।

अपने भाषण में राष्ट्रपति गोविंद ने प्रत्येक तबके के व्यक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि हमारे प्रयास से समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े हुए व्यक्ति के लिए और गरीब परिवार की उस आखिरी बेटी के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खुल सकें।

राष्ट्रपति कोविंद उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव परौंख से संबंध रखते हैं और कोविंद जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। जो हर इंसान का दर्द महसूस करते हैं और इसीलिए अपने प्रथम भाषण के जरिए उन्होंने यह दिखा दिया है कि वह सही मायने में गरीबों के मसीहा के रूप में पद पर आसीन हुए हैं और उनकी जरूरतों पे खरा उतरेंगे। भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम तय होने के बाद भी उन्होंने एक बार भी अपनी जाति को अपनी पहचान के रुप में विश नहीं किया और शायद उनकी यही विचारधारा उन्हें बाकियों से अलग करती है।

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